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An Indian Morning

An Indian Morning
Sunday May 5th, 2019 with Dr. Harsha V. Dehejia and Kishore "Kish" Sampat
An Indian Morning celebrates not only the music of India but equally its various arts and artisans, poets and potters, kings and patriots. The first 30 minutes of the program features classical, religious as well as regional and popular music. The second

An Indian Morning celebrates not only the music of India but equally its various arts and artisans, poets and potters, kings and patriots. The first 30 minutes of the program features classical, religious as well as regional and popular music. The second one hour features community announcements and ear pleasing music from old/new & popular Indian films. The ethos of the program is summarized by its signature closing line, "Seeking the spirit of India, Jai Hind". Please remember to tune in to 2312th edition of "An Indian Morning" with Dr. Harsh Dehejia and Kishore Sampat on Sunday, May 5th from 10:00 AM till 11:30 AM on CKCU-FM 93.1. 🙏🏻🌹🙏🏻 *मुस्कुराते* रहिए...😄👍🏻😄👌🏻😀 फूल की सुगंध को मिट्टी तो ग्रहण कर लेती है , पर मिट्टी की गंध को फूल ग्रहण नहीं करता | ✿ ✣ ✤ ✥ ✦ ✧ ❄ ✧ ✦ ✥ ✤ ⊹ ✿⊰ ्नेह वंदन* आपका दिन मंगलमय हो* *💐भोर सुहानी💐* *💐दिन मस्ताना💐*‎GOOD MORNING! An Indian Morning celebrates not only the Music of India but equally its various arts and artisans, poets and potters, kings and patriots. The first half of the program features classical and religious music as well as regional and popular music. The second half features community announcements, Ghazals, Themes, Popular Old & New Bollywood Films music and more. The ethos of the program is summarized by its signature closing line, "Seeking the spirit of India, Jai Hind". 01-RAM GOVIND HARI CD MISC-20190505 TRACK#01 5:34 VANDE GURU PARAMPARAAM-2016; RAHUL VELLAL; KULDEEP M PAI; SANT KABIR https://www.youtube.com/watch?v=ixMvbjEUP-g एक बार फिर हार्दिक अभिनंदन आप सबका, शुक्रिया, घन्यवाद और Thank You इस प्रोग्राम को सुनने के लिए । An Indian Morning” के सभी दोस्तों को हमारा सलाम! दोस्तों, शेर-ओ-शायरी, नज़्मों, नगमों, ग़ज़लों, क़व्वालियों की रवायत सदियों की है। निगाहों से हमें समझा रहे हैं ग़ुलाम अली आज कहकशाँ में एक अदबी महफ़िल, कहकशाँ। आज पेश है ग़ुलाम अली की गाई हुई एक ग़ज़ल। साल 1983 में पैशन्स (Passions) नाम की ग़ज़लों की एकग ऐल्बम आई थी। उस एलबम में एक से बढ़कर एक कुल नौ गज़लें थी। मज़े की बात है कि इन नौ ग़ज़लों के लिए आठ अलग-अलग गज़लगो थे: प्रेम वरबरतनी, एस एम सादिक़, अहमौम फ़राज़, हसन रिज़वी, मोहसिन नक़्वी, चौधरी बशीर, जावेद कुरैशी और मुस्तफा ज़ैदी। और इन सारे गज़लगो की गज़लों को जिस फ़नकार या कहिए गुलूकार ने अपनी आवाज़ और साज़ से सजाया था आज की यह महफिल उन्हीं को नज़र है। उम्मीद है कि आप समझ ही गए होंगे। जी हाँ, हम आज पटियाला घराना के मशहूर पाक़िस्तानी फ़नकार "ग़ुलाम अली" साहब की बात कर रहे हैं। ग़ुलाम अली साहब, जो कि बड़े ग़ुलाम अली साहब के शागिर्द हैं और जिनके नाम पर इनका नामकरण हुआ है, गज़लों में रागों का बड़ा ही बढ़िया प्रयोग करते हैं। बेशक़ ही ये घराना-गायकी से संबंध रखते हैं, लेकिन घरानाओं (विशेषकर पटियाला घराना) की गायकी को किस तरह गज़लों में पिरोया जाए, इन्हें बख़ूबी आता है। ग़ुलाम अली साहब की आवाज़ में वो मीठापन और वो पुरकशिश ताज़गी है, जो किसी को भी अपना दीवाना बना दे। अपनी इसी बात की मिसाल रखने के लिए हम आपको ’पैशन्स’ ऐल्बम से एक गज़ल सुनाते हैं, जिसे लिखा है जावेद कुरैशी ने। हाँ, सुनते-सुनते आप मचल न पड़े तो कहिएगा। अच्छा रूकिये, सुनने से पहले थोड़ा माहौल बनाना भी तो ज़रूरी है। अरे भाई, गज़ल ऐसी चीज़ है जो इश्क़ के बिना अधूरी है और इ्श्क़ एक ऐसा शय है जो अगर आँखों से न झलके तो कितने भी लफ़्ज क्यों न कुर्बान किए जाएँ, सामने वाले पर कोई असर नहीं होता। इसलिए आशिक़ी में लफ़्ज़ परोसने से पहले ज़रूरी है कि बाकी सारी कवायदें पूरी कर ली जाएँ। और अगर आशिक़ आँखों की भाषा न समझे तो सारी आशिक़ी फिज़ूल है। मज़ा तो तब आता है जब आपका हबीब लबों से तबस्सुम छिरके और आँखों से सारा वाक्या कह दे। इसी बात पर मुझे एक पुराना शेर याद आ रहा है: दबे लब से मोहब्बत की गुज़ारिश हो जो महफिल में, न होंगे कमगुमां हम ही, न होंगे वो ही मुश्किल में। यह तो हुआ मेरा शेर, अब हम उस ग़ज़ल की ओर बढ़ते हैं जिसके लिए आज की कहकशाँ जगमगाई है। वह ग़ज़ल आप सबके सामने पेशे-खिदमत है: 02-NIGAHON SE HUMEIN SAMJHA RAHE HAIN CD MISC-20190505 TRACK#02 5:10 PASSION-1983; GHULAM ALI; JAVED QURESHI https://www.youtube.com/watch?v=wzxnxHVt7wY जब इरशाद क़ामिल, प्रीतम और मोहित ने रचा एक बेहद रोमांटिक नग्मा.. दूर से आता आलाप. गिटार की धुन में घुलता सा हुआ और उसमें से निकलती मोहित चौहान की रूमानियत में डूबी आवाज़ ! अगले गीत के मुखड़े को इसी तरह परिभाषित किया जा सकता है। अब अगर मैं ये कहूँ कि इस गीत को मुझे आपको सुनाना नहीं बल्कि इस मीठे से नग्मे की चाशनी आपको पिलानी हो तो क्या आप इस गीत को नहीं पहचान जाएँगे? जी हाँ प्रस्तुत गीत है फिल्म Once Upon A Time In Mumbai का । इरशाद क़ामिल और प्रीतम ने इस गीत में मिल कर दिखा दिया है कि जब अर्थपूर्ण भावनात्मक शब्दों को कर्णप्रिय धुनों का सहारा मिल जाए तो गीत में चार चाँद लग जाते हैं। गीत के मुखड़े में इरशाद कहते हैं.. पी लूँ , तेरे नीले नीले नैनों से शबनम पी लूँ , तेरे गीले गीले होठों की सरगम तो मन मनचला बन ही जाता है ...गीत के रस को और पीने के लिए मुखड़े के बाद के कोरस का सूफ़ियाना अंदाज भी दिल को भाता है। तेरे संग इश्क़ तारी है तेरे संग इक खुमारी है तेरे संग चैन भी मुझको तेरे संग बेक़रारी है दरअसल एक प्रेमी की मानसिक अवस्था को गीत की ये पंक्तियाँ बखूबी उकेरती हैं। अपने एक साक्षात्कार में इरशाद क़ामिल ने कहा था कि आजकल के तमाम गीतों के मुखड़े तो ध्यान खींचते हैं पर अंतरों में जान नहीं हो पाने के कारण वो सुनने वालों के दिलों तक नहीं पहुँच पाते। होना ये चाहिए कि जो भावना या विचार मुखड़े के ज़रिए श्रोताओं तक पहुँचा है उस भाव का विस्तार अंतरे में देखने को मिले। प्रीतम के इंटरल्यूड्स गीत के असर को और प्रगाढ़ करने में सफल रहे हैं और मोहित की आवाज़ तो ऍसे गीतों के साथ हमेशा से खूब फबती रही है। तो आइए आँखें बंद करें और मन को गीत के साथ भटकने दें। शायद भटकते भटकते आप अपने उन तक पहुँच जाएँ… 03-PEE LOON CD MISC-20190505 TRACK#03 4:15 ONCE UPON A TIME IN MUMBAI-2010; MOHIT CHAUHAN; PRITAM; IRSHAD KAAMIL https://www.youtube.com/watch?v=D8XFTglfSMg मैं तैनू समझावाँ की, न तेरे बिना लगदा जी .. Main Tenu Samjhawan Ki .. अगला गाना है 'हम्पटी शर्मा की दुल्हनिया' का। मेरे ख्याल से इस फिल्म के गीत समझावाँ से आप सभी भली भांति परिचित होंगे। ये गीत अपनी मधुरता की वज़ह से सभी के दिल में जगह बनाने में कामयाब रहा । यूँ तो फिल्म में इस गीत को अरिजित सिंह और श्रेया घोषाल ने गाया है पर फिल्म के प्रदर्शित होने के समय इस गीत का एक और वर्सन अभिनेत्री अलिया भट्ट की आवाज़ में रिकार्ड हुआ। एक पेशेवर गायिका ना होने के बावज़ूद अलिया ने इस गीत को जितने करीने से निभाया है वो तारीफ़ करने योग्य है। वैसे फिल्म में प्रयुक्त ये गीत सबसे पहले भारत व पाकिस्तान के संयुक्त प्रयास से बनी एक पंजाबी फिल्म विरसा यानि विरासत में राहत फतेह अली खाँ की आवाज़ में रिकार्ड हुआ था। उस फिल्म में इस गीत को संगीतबद्ध किया था जावेद अहमद ने और इसके पंजाबी बोल लिखे थे अहमद अनीस ने। पंजाबी व हिंदी फिल्मों के गीतकार कुमार ने गीत के कुछ हिस्सों को बदल दिया वहीं संगीतकार जोड़ी शरीब तोशी ने इसके संगीत संयोजन को परिवर्तित किया। जो वर्सन अलिया ने गाया है उसका संगीत संयोजन मुझे तो मूल गीत से भी लाजवाब लगता है। मुखड़े के पहले वाली ताल वाद्यों की हल्की हल्की ठपकी हो या फिर इ्टरल्यूड्स में गिटार के साथ उसका मधुर संगम .... उसे सुनते हुए कानों में शहद सा घुलता महसूस होता है। अलिया ने इससे पहले फिल्म हाइवे में जेब के साथ गीत सूहा साहा में एक अंतरे को गाया था जिसकी विस्तार से चर्चा हो चुकी है। पर यहाँ उनके सामने मुखड़े और दो अंतरे गाने के साथ गीत के ऊँचे सुरों को निभाने की भी चुनौती थी जिसे उन्होंने भली भांति निभाया। उन्होंने गीत की भावनाओं को अपनी आवाज़ में क़ैद करने की अच्छी कोशिश की है। कई बार फिल्म के प्रमोशन के दौरान इस गीत को गाते वक्त, गीत का दर्द उन्हें रुला भी गया। अपने गायन के बारे में अलिया को कोई मुगालता नहीं है। हिंदी गीतों में पंजाबी का इस्तेमाल इतना बढ़ा है कि एक आम हिंदी संगीत प्रेमी भी उत्सुकतावश कुछ ना कुछ पंजाबी सीख ही गया है। वैसे तो इस गीत की पंजाबी समझने में उतनी मुश्किल नहीं है । फिर भी आपकी सहूलियत के लिए उसका अनुवाद करने की कोशिश की है। मैं तुम्हारे बिना नहीं जीना चाहती। में तुम्हें कैसे समझाऊँ कि तुम्हारे बिना एक पल भी मन नहीं लगता मेरा। तुम्हीं तो मेरा हृदय, मेरी आत्मा हो। तुम्हारे इंतज़ार में घड़ियाँ गिनती रहती हूँ मैं। तुम क्या समझो मेरे प्रेम को? मेरे दिल ने तो तुम्हारे दिल की राहें चुन ली हैं। ये ज़िदगी मेरे लिए कितनी आसान हो जाती गर तू मेरे पास रहता। अब तो मैंने ये जीवन तेरे नाम कर दिया है। तुम्ही बताओ मैं तुम्हें ये यकीन दिलाने के लिए क्या करूँ ? तो आइए अब सुनते हैं हमारी नायिका की अपने प्रेमी को की गई ये करुण पुकार जिसे सुनकर मन कुछ गुमसुम और भींगा भींगा सा हो जाता है… 04-MEIN TENU SAMJAWAN KI CD MISC-20190505 TRACK#04 3:45 HUMPTY SHARMA KI DULHANIA-2014; ALIA BHATT; SHARIB-TOSHI; KUMAAR https://www.youtube.com/watch?v=EoCz3Vx1pXg आइए डूबें श्रेया और राहत के साथ मेलोडी की दुनिया में ! सा रे गा मा जैसे म्यूजिकल टैलंट हंट (Musical Talent Hunt) की उपज श्रेया को गाने का पहला मौका संजय लीला भंसाली ने देवदास में दिया था और उसके बाद इस प्रतिभाशाली गायिका ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा है। सिंह इज किंग के इस युगल गीत में श्रेया का साथ दिया हैं जनाब राहत फतेह अली खाँ साहब ने। श्रेया की मीठी रूमानी आवाज़ के पार्श्व से जब राहत जी की बुलंद आवाज़ उभरती है तो इन दोनों आवाजों का संगम एक समां बाँध देता है जिसकी तासीर घंटों ज़ेहन में विद्यमान रहती है। प्रीतम यूँ तो धुनों की चोरी के लिए बदनाम हैं पर हर साल वो कुछ ऍसी जबरदस्त धुनें भी देते हैं जिससे आश्चर्य होता है कि इतने प्रतिभाशाली होने के बावज़ूद धुन बनाने के लिए बारहा इन्हें inspired क्यूँ होना पड़ता है ? इस गीत के बोल लिखे हैं मयूर सूरी ने जो एक नवोदित गीतकार के साथ साथ संवाद लेखन का भी काम करते हैं। मयूर और प्रीतम की जोड़ी ने इससे पहले भी फिल्म प्यार के साइड एफेक्ट्स में एक कमाल का गीत जाने क्या चाहे मन बावरा... दिया था जो मुझे प्रीतम की सबसे दिलअजीज़ रचना लगती है। तो आइए डालें इस गीत के बोलों पर एक नज़र और सुनें ये प्रेम से ओतप्रोत ये गीत… 05-TERI ORE CD MISC-20190505 TRACK#05 6:07 SINGH IS KINGG-2008; SHREYA GHOSHAL, RAHAT FATEH ALI KHAN; JPRITAM; MAYUR PURI https://www.youtube.com/watch?v=GzN_p5afVeA तेरा होने लगा हूँ खोने लगा हूँ.. तो चलिए आज फिर से विशुद्ध बॉलीवुड रोमांटिक मेलोडी का स्वाद चखने। ये गाना साल 2009 के अंत में आया और हर जगह छा गया और आज भी इसे सुनने पर एक मीठा मीठा सा अहसास मन में तारी रहता है और आप इसे गुनगुनाने का लोभ संवरण नहीं कर सकते। तारीफ करनी होगी संगीतकार प्रीतम की जिन्होंने एक बेहतरीन धुन के साथ आलिशा चिनॉय और आतिफ असलम को इस गीत को गाने को चुना। गीत शुरु होता है अंग्रेजी जुबान में। shining in the sand n sun like a pearl upon the ocean come and feel me, girl feel me प्रीतम अपने गीतों में अंग्रेजी की पंक्तियाँ, हिंदी अंतरों के बीच में पहले भी डालते आए हैं। वर्ष 2006 में उन्होंने फिल्म 'प्यार के साइड एफेक्टस' के लिए एक गीत रचा था जाने क्या चाहे मन बावरा.. जिसे मैं उनकी बेहतरीन कम्पोशीसन में से एक मानता हूँ। वहाँ भी अंग्रेजी का एक अंतरा ठीक इसी तरह लगाया था उन्होंने! मन सोचता है कि क्या इसकी जरूरत थी? शायद आज के अंग्रेजीदाँ युवा वर्ग को गीत से जोड़ना उनका मकसद रहा हो। कई जगह संगीतप्रेमियों द्वारा इसकी आलोचना भी पढ़ी। पर मेरा मत तो यही है कि ये अगर ना भी करते तो भी चलता और अगर किया भी है तो वो अंतरा इस गीत के साथ भावनात्मक तौर पर जुड़ा ही दिखता है। खैर, आशीष पंडित के लिखे इस गीत में अपनी शहद सी आवाज़ का जादू बिखेरा है अलीशा चिनॉय ने। अलीशा हिंदी पॉप जगत में बेबी डॉल के नाम से मशहूर इंडियन मेडोना की छवि को बनाने में व्यस्त थीं। अलीशा की इस बात पर दाद देनी होगी कि इतने लंबे समय में भी उनकी आवाज़ में वही खनक बरकरार है जो तीस साल पहले थी। वैसे उनके बारे में एक रोचक तथ्य ये है जिसे आप अलीशा के नाम से जानते हैं, उनका वास्तविक नाम 'सुजाता' था जिसे बाद में उन्होंने अपनी भतीजी के नाम पर बदल कर अलीशा कर लिया। इस गीत के रोमांटिक मूड को पुख्ता करने में भी अलीशा की आवाज़ का महती योगदान है। रहे आतिफ साहब तो उनकी आवाज़ और लोकप्रियता के बारे में मैं पहले ही यहाँ चर्चा कर चुका हूँ। तो आइए एक बार फिर सराबोर हो लें इस गीत की रूमानियत में.. 06-TERA HONE LAGAA HOON CD MISC-20190505 TRACK#06 4:54 AJAB PREM KI GHAZAB KAHANI-2009; ATIF ASLAM, ALISHA CHINOY; PRITAM; AASHISH PANDIT https://www.youtube.com/watch?v=Dhnx6Kq9whs HUMEIN TUMSE PYAR KITNA – KUDRAT (1981) A time-tested tradition in Hindi films has been the presence of male and female versions of a song. The variation on the happy-sad song (the most recent example is Kalank) has resulted in a healthy contest between voices. Who does it better? The Hindi film music industry sometimes makes that decision on behalf of listeners by relegating the female version to YouTube rather than let it find its place in the narrative. This could be because the hero has traditionally carried the burden of the story and a movie’s commercial success. This could be because the hero has traditionally carried the burden of the story and a movie’s commercial success. The male version often appears first in the movie and is filmed better than its follow-up female twin. And yet, when you shut out the visuals and let your ears take the decision, the results can be fascinating. The strongest possible case for the woman’s voice trumping the male’s. Kishore Kumar’s robust, untrained singing is no match for the craft of Hindustani classical singer Parveen Sultana. Sultana’s version appears first in the film, performed on a stage by Aruna Irani’s singer character. The music is by RD Burman. In contrast to the sedate female version, the Kishore Kumar song is used for a romantic moment between leads Rajesh Khanna and Hema Malini. Two attractive movie stars, lush visuals, and a generous use of dissolves complete the experience. We bring you the female version of “HUMEIN TUMSE PYAR KITNA” by Parveen Sultana followed by the male version by Kishore Kumar. You be the judge! 07-HUMEIN TUMSE PYAR KITNA CD MISC-20190505 TRACK#06 4:59 KUDRAT-1981; PARVEEN SULTANA; R. D. BURMAN; MAJROOH SULTANPURI https://www.youtube.com/watch?v=KyoLP2CETg0 08-HUMEIN TUMSE PYAR KITNA CD MISC-20190505 TRACK#08 4:12 KUDRAT-1981; KISHORE KUMAR; R. D. BURMAN; MAJROOH SULTANPURI https://www.youtube.com/watch?v=2tWegG6T58U JAB KOI BAAT BIGAD JAAYE (JURM, 1990) Ekta Kapoor still uses this song in the background of many of her soaps! That should tell you something about the brilliance of this number. The fact that the lyrics say exactly what human beings have been saying to their loved ones for as long as we can remember. 09-JAB KOI BAAT BIGAD JAAYE MISC-20190505 TRACK#09 5:25 JURM-1990; KUMAR SANU, SADHNA SARGAM; RAJESH ROSHAN; INDEEVAR https://www.youtube.com/watch?v=qE7C35WxKno THE END समाप्त
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