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An Indian Morning

An Indian Morning
Sunday April 28th, 2019 with Dr. Harsha V. Dehejia and Kishore "Kish" Sampat
An Indian Morning celebrates not only the music of India but equally its various arts and artisans, poets and potters, kings and patriots. The first 30 minutes of the program features classical, religious as well as regional and popular music. The second

An Indian Morning celebrates not only the music of India but equally its various arts and artisans, poets and potters, kings and patriots. The first 30 minutes of the program features classical, religious as well as regional and popular music. The second one hour features community announcements and ear pleasing music from old/new & popular Indian films. The ethos of the program is summarized by its signature closing line, "Seeking the spirit of India, Jai Hind". 01-NARAYANAM BHAJE NARAYANAM CD MISC-20190428 TRACK#01 5:40 VANDE GURU PARAMPARAAM-2016; ABIRAMI, CHARUKESI; KULDEEP M PAI https://www.youtube.com/watch?v=BnLfUf1Iefc एक बार फिर हार्दिक अभिनंदन आप सबका, शुक्रिया, घन्यवाद और Thank You इस प्रोग्राम को सुनने के लिए । An Indian Morning” के सभी दोस्तों को हमारा सलाम! दोस्तों, शेर-ओ-शायरी, नज़्मों, नगमों, ग़ज़लों, क़व्वालियों की रवायत सदियों की है। कुछ फ़नकार ऎसे होते हैं जिनके बारे में लिखने चलो तो न आपको मस्तिष्क के घोड़े दौड़ाने पड़ते हैं और न ही आपको अतिशयोक्ति का सहारा लेना होता है, शब्द खुद-ब-खुद ही पन्ने पर उतरने लगते हैं। यूँ तो आलेख लिखते समय लेखक को कभी भी भावुक नहीं होना चाहिए, लेकिन आज के जो फ़नकार हैं उनकी लेखनी का मैं इस कदर दीवाना हूँ कि तन्हाई में भी मेरे इर्द-गिर्द उनके ही शब्द घूमते रहते हैं। आज हम जिनकी बात कर रहे हैं, वह गाने के संगीतकार या गायक नहीं बल्कि इसके गीतकार हैं। आज हम पद्म भूषण श्री संपूरण सिंह "गुलज़ार" की बात कर रहे हैं। २००६ में गु्लज़ार साहब (इन्हें अमूमन इसी नाम से संबोधित किया जाता है) और जगजीत सिंह जी की ग़ैर-फिल्मी गानों की एक एलबम आई थी "कोई बात चले"। यूँ तो जगजीत सिंह ग़ज़ल-गायकी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस एलबम के गीतों को ग़ज़ल कहना सही नहीं होगा, इस एलबम के गीत कभी नज़्म हैं तो कभी त्रिवेणी। त्रिवेणी को तख़्लीक़-ए-गुलज़ार भी कहते हैं क्योंकि इसकी रचना और संरचना गुलज़ार साहब के कर-कमलों से ही हुई है। त्रिवेणी वास्तव में क्या है, क्यों न गु्लज़ार साहब से ही पूछ लें। बकौल गु्लज़ार साहब : "शुरू शुरू में जब ये फ़ार्म बनाई थी तो पता नहीं था यह किस संगम तक पहुँचेगी - त्रिवेणी नाम इसलिए दिया था कि पहले दो मिसरे गंगा, जमुना की तरह मिलते हैं और एक ख़्याल, एक शेर को मुकम्मल करते हैं। लेकिन इन दो धाराओं के नीचे एक और नदी है - सरस्वती, जो गुप्त है, नज़र नहीं आती। त्रिवेणी का काम सरस्वती दिखाना है। तीसरा मिसरा कहीं पहले दो मिसरों में गुप्त है, छुपा हुआ है।" "ज़िंदगी क्या है जानने के लिए" प्रस्तुत गीत में गुलज़ार साहब इन्हीं मुद्दों पर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं। तो लीजिए आप सबके सामने पेश-ए-खिदमत है ज़िंदगी की बेबाक तस्वीर: आदमी बुलबुला है पानी का 02-ZINDAGI KYA HAI CD MISC-20190428 TRACK#02 5:10 KOI BAAT CHALE-2006; JAGJIT SINGH; GULZAR https://www.youtube.com/watch?v=P8Je2dsI5JY कहूँ दोस्त से दोस्त की बात क्या.. क्या.. आबिदा परवीन Kahoon Dost se Dost Ki Baat Kya Kya : Abida Parveen कल आबिदा परवीन जी को सुन रहा था। बाबा ज़हीन साहब ताजी का लिखा कलाम गा रही थीं "कहूँ दोस्त से दोस्त की बात क्या.. क्या.." । ग़ज़ल तो मतले के बाद किसी और रंग में रंग गयी पर इस मिसरे ने माज़ी के उन लमहों की याद ताजा कर दी जब जब इस शब्द की परिभाषा पर कोई ख़रा उतरा था। बचपन के दोस्तों की खासियत या फिर एक सीमा कह लीजिए कि वो जीवन के जिस कालखंड में हमसे मिले बस उसी के अंदर की छवि को मन में समाए हम जीवन भर उन्हें स्नेह से याद कर लिया करते हैं। हाईस्कूल एवं कॉलेज के दोस्तों में दो तीन से ही संपर्क रह पाया है। बाकी सब कहाँ है पता नहीं। पर उनका ख्याल रह रह कर ज़हन में आता रहता है। ये नहीं कि वे मेरे बड़े जिगरी दोस्त थे पर बस इतना भर जान लेना कि वो कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं मन को बड़ा संतोष देता है। वो पढ़ाई का तनाव, साझा क्रश, फालतू की शैतानियाँ, नौकरी पाने की जद्दोज़हद कितना कुछ तो हमेशा रहता है फिर से उन स्मृतियों में गोते लगाने के लिए। ये तो हुई गुजरे वक़्त की बातें। आज तो अंतरजाल पर हजारों किमी दूर बैठे किसी शख्स को आप चुटकियों में दोस्त बना लेते हैं। पर दोस्तों की इसभारी भीड़ में अगर कोई ये पूछे कि इनमें से कितनों के साथ आपके मन के तार जुड़े हैं? कौन हैं वो जो बिना बोले आपकी मन की भावनाओं को समझ लेते हैं? अपनी हताशा अपनी पीड़ा को किसके सामने बिना झिझक के बाँट सकते हैं आप? तो लगभग एक सा ही जवाब सुनने को मिलेगा। हममें से हर किसी के लिए ये संख्या उँगलिओं पे गिनी जा सकती है। कहूँ दोस्त से दोस्त की बात क्या.. क्या.. रही दुश्मनों से मुलाकात क्या क्या आबिदा जी की गायिकी हमेशा से बेमिसाल रही है। इस गीत में जिस तरह से उन्होंने 'कहूँ', 'क्या क्या' या 'गुफ्तगू' जैसे टुकड़ों को अलग अलग तरीके से भावनाओं डूब कर दोहराया है कि मन सुन कर गदगद हो जाता है। अगर आपने कोक स्टूडियो के सीजन सात में उनकी ये प्रस्तुति नहीं देखी तो जरूर देखिए.. 03-KAHOON DOST SE DOST KI BAAT KYA KYA CD MISC-20190428 TRACK#03 6:46 COKE STUDIO SEASON 7-2014; ABIDA PARVEEN; BABA JAHEEN https://www.youtube.com/watch?v=hzb6uI7xRA8 मुड़ मुड़ के न देख मुड़ मुड़ के... आज राज कपूर और मन्ना डे की जोड़ी का जो गीत हम लेकर आये हैं वह है फ़िल्म 'श्री ४२०' का। आशा भोंसले, मन्ना डे और साथियों की आवाज़ों में बेहद लोकप्रिय यह क्लब गीत है "मुड़ मुड़ के ना देख मुड़ मुड़ के"। 'श्री ४२०' १९५५ की सबसे बड़ी ब्लाकबस्टर फ़िल्म थी। राज कपूर, नरगिस, नादिरा और ललिता पवार के जानदार अभिनय तो थे ही, साथ ही शंकर जयकिशन और हसरत-शैलेन्द्र के धूम मचाते गीत संगीत ने इस फ़िल्म को अमर बना दिया है। फ़िल्म का हर एक गीत कहानी के साथ कहानी को आगे बढ़ाते हुए ले जाता है। गीतों के मूड और रफ़्तार भी किरदारों के मन की स्थिति को बयाँ करते हैं। जैसे कि इसी गीत को ले लीजिये, गीत शुरु होता है नादिरा की धीमी नशीली चाल के साथ, लेकिन बाद मे राज कपूर वाले हिस्से मे उसकी रफ़्तार तेज़ हो जाती है जो उनके दिल की हलचल और बेक़रारी की स्थिति को दर्शाता है। ऐसा कहा जाता है कि यह गीत शुरु मे फ़िल्म मे नही था। लेकिन राज कपूर को जब नादिरा की नृत्यकला के बारे मे पता चला तो उन्होने ख़ास उनके नृत्य को फ़िल्म मे जगह देने के लिए एक 'सिचुयशन' बनाया और शंकर जयकिशन से गाना तैयार करने को कहा। नादिरा फ़िल्म मे खलनायिका की भूमिका मे थीं, इसलिए उसी अंदाज़ में यह गाना लिखा गया, संगीतबद्ध किया गया और उसी मादक अंदाज़ मे गाया भी गया। ट्रम्पेट साज़ का बेहद ख़ूबसूरत इस्तेमाल इस गीत मे सुनने को मिलता है। तो अब और देरी किस बात की, सुनिए और झूमिये। 04-MUDH MUDH KE NAA DEKH CD MISC-20190428 TRACK#04 5:35 SHREE 420-1956; MANNA DEY, ASHA BHOSLE; SHANKAR-JAIKISHAN; SHAILENDRA https://www.youtube.com/watch?v=R3D3YNmg-Ak ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली-शर्मीली १९७१ सुनते हैं फिल्म शर्मीली का शीर्षक गीत। गीत के शुरू में ऐसा लगता है मानो गाने वाले के ऊपर एक बाल्टी ठंडा पानी डाल दिया गया हो और उसे तुरंत गाने को कहा गया हो। गायन में जितने प्रयोग किशोर कुमार और मन्ना डे के ऊपर किये गए शायद ही और गायकों को ये अवसर मिले हों। गीत अपने में काफी लोकप्रिय रहा है और आज भी कभी कभार सुनाई दे जाता है। नीरज का लिखा गीत किशोर कुमार ने गाया है एस डी बर्मन के संगीत निर्देशन में। गीत में गीतकार का नाम भी एक बार आता है चाहे आँखों की तारीफ़ के बहाने ही हो। 05-O MERE O MERI SHARMEELEE CD MISC-20190428 TRACK#05 3:58 SHARMEELEE-1971; KISHORE KUMAR; S. D. BURMAN; NEERAJ https://www.youtube.com/watch?v=BLptcBu0a44 A time-tested tradition in Hindi films has been the presence of male and female versions of a song. The variation on the happy-sad song (the most recent example is Kalank) has resulted in a healthy contest between voices. Who does it better? The Hindi film music industry sometimes makes that decision on behalf of listeners by relegating the female version to YouTube rather than let it find its place in the narrative. Thus, the better song slips under the radar, as was the case with Jag Ghoomeya (Sultan, 2016), sung by Rahat Fateh Ali Khan and Neha Bhasin. Only Khan’s version was used in Sultan. This could be because the hero has traditionally carried the burden of the story and a movie’s commercial success. The male version often appears first in the movie and is filmed better than its follow-up female twin. And yet, when you shut out the visuals and let your ears take the decision, the results can be fascinating. We bring you the male version of “Jag Ghoomeya” by Rahat Fateh Ali Khan and the female version by Neha Bhasin. You be the judge! 06-JAG GHOOMEYA CD MISC-20190428 TRACK#06 4:36 SULTAN-2016; RAHAT FATEH ALI KHAN; VISHAL-SHEKHAR; IRSHAD KAMIL https://www.youtube.com/watch?v=t10sQb0Zmjs 07-JAG GHOOMEYA CD MISC-20190428 TRACK#07 3:05 SULTAN-2016; NEHA BHASIN; VISHAL-SHEKHAR; IRSHAD KAMIL https://www.youtube.com/watch?v=wJlSp67uZYU JAB KOI BAAT BIGAD JAAYE (JURM, 1990) Ekta Kapoor still uses this song in the background of many of her soaps! That should tell you something about the brilliance of this number. The fact that the lyrics say exactly what human beings have been saying to their loved ones for as long as we can remember. 08-JAB KOI BAAT BIGAD JAAYE MISC-20190428 TRACK#08 5:25 JURM-1990; KUMAR SANU, SADHNA SARGAM; RAJESH ROSHAN; INDEEVAR https://www.youtube.com/watch?v=qE7C35WxKno THE END समाप्त
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