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An Indian Morning

An Indian Morning
Sunday January 6th, 2019 with Dr. Harsha V. Dehejia and Kishore "Kish" Sampat
An Indian Morning celebrates not only the music of India but equally its various arts and artisans, poets and potters, kings and patriots. The first 30 minutes of the program features classical, religious as well as regional and popular music. The second

An Indian Morning celebrates not only the music of India but equally its various arts and artisans, poets and potters, kings and patriots. The first 30 minutes of the program features classical, religious as well as regional and popular music. The second one hour features community announcements and ear pleasing music from old/new & popular Indian films. The ethos of the program is summarized by its signature closing line, "Seeking the spirit of India, Jai Hind". 01-MUKUN MADHAV HARI HARI BOL CD MISC-20190106 TRACK#01 6:21 PREMANJALI PUSHPANJALI-2012; HARI OM SHARAN https://www.youtube.com/watch?v=1AsaqIOaGws हार्दिक अभिनंदन आप सबका, शुक्रिया, धन्यवाद और Thank You इस प्रोग्राम को सुनने के लिए। दोस्तों "कहकशां" और "महफिले ग़ज़ल" का ऑडियो स्वरुप लेकर हम हाज़िर हैं, "महफिल ए कहकशां" के रूप में । अदब और शायरी की इस महफ़िल में आज पेश है इंदीवर की लिखी हुई एक ग़ज़ल जिसे जगजीत सिंह ने गाया है, फिल्म प्रेमगीत से। इस गीत में जगजीत की आवाज़ और संगीत इस तरह घुल मिल गए है कि उन पर अलग अलग टिप्पणी करना संभव नहीं। भगवान ने जगजीत जी की आवाज़ बनाई ही ऐसी थी जिससे दर्द यूँ छलकता था जैसे लबालब भरी हुई मटकी से पानी और इसीलिए आज भी लोग इसे सुनते हैं तो भावुक हो जाते हैं। जहाँ तक फिल्मी गीतों की बात है ये उनकी सबसे सुरीली पेशकश रही है। इस फिल्म के लिए जगजीत ने एक और संगीत रचना की थी जो सराही गयी थी। गीत के बोल थे आओ मिल जाएँ सुगंध और सुमन की तरह। फिलहाल तो प्रेम गीत का ये अजर अमर गीत सुनिए। 02-HOTHON SE CHHULO TUM CD MISC-20190106 TRACK#02 4:27 PREMGEET-1981; JAGJIT SINGH; INDEEVAR https://www.youtube.com/watch?v=dDO9ZRSNB9s नया साल आ चुका है और An Indian Morning पर वार्षिक संगीतमालाओं के लिए साल भर के पच्चीस बेहतरीन गीत चुनने की क़वायद ज़ारी है। दिसंबर से ही एक बोझ सा आ जाता है मन में कि क्या पच्चीस गीतों की फेरहिस्त आसानी से पूरी हो पाएगी। पर हर साल प्रदर्शित हुई लगभग सौ से ज़्यादा फिल्मों के गीतों से गुजरता हूँ तो कभी कभी गीतों के अटपटेपन से मन में कोफ्त सी हो जाती है पर जैसे जैसे गीतों को चुनने की प्रक्रिया अपने आख़िरी चरण में पहुँचती है अच्छे गीतों को सुनकर सारा कष्ट काफूर हो जाता है और चुनने लायक गीतों की संख्या पच्चीस से भी अधिक होने लगती है। फिर समस्या आती है कि किसे छोड़ूँ और किसे रखूँ? An Indian Morning पर वक़्त आ गया है इस साल की वार्षिक संगीतमाला का जिसमें चुने जाएँगे साल 2018 की रिलीज़ हुई फिल्मों के पच्चीस पसंदीदा गीत। 2018 में रिलीज़ हुई सारी फिल्मों के गीतों को सुन चुकने के बाद मैंने तो लगभग अपनी राय कायम कर ली है और उसे यहाँ सिलसिलेवार ढंग से प्रस्तुत करूँगा। वार्षिक संगीतमााला 2018 पायदान # 25 इतनी सुहानी बना, हो ना पुरानी तेरी दास्तां… Teri Dastaan साल के पच्चीस बेहतरीन गीतों की इस संगीतमाला का शुरुआती बिगुल बजाने आ गया है फिल्म हिचकी का ये गीत जिसकी धुन बनाई जसलीन कौर रायल ने, गीत के बोल लिखे नीरज राजावत और गाया भी खुद जसलीन ने। An Indian Morning की वार्षिक संगीतमालाओं में शायद ये दूसरा मौका है जब किसी महिला संगीतकार का नाम किसी गीत में आया है। इससे पहले Gangs of Wassepur के एक गीत मेरा जूता फेक लेदर की बदौलत स्नेहा खानवलकर इस संगीतमाला का हिस्सा बनी थीं। ये संयोग ही है कि जसलीन आज की आवाज़ों में अमित त्रिवेदी के साथ साथ स्नेहा को भी पसंद करती हैं। जसलीन की गायिकी से ज्यादा इस गीत और पूरे एलबम में उनके संगीत निर्देशन ने प्रभावित किया। तेरी दास्तान मेरी समझ से उनकी इस फिल्म की सबसे बेहतरीन रचना है। इस गीत का संगीत उन्होंने फिल्म के सेट पर रचा है। जिस तरह गीत के बीच और इंटरल्यूड्स में उन्होंने वॉयलिन के साथ पियानो का प्रयोग किया है वो गीत के मूड को अच्छी तरह पकड़ता है। नीरज अंतरों में भी बोलों की सार्थकता बनाए रखते हैं। नीरज का कहना है कि इन बोलों को अंतिम रूप देते देते जसलीन ने उनकी पेन की पूरी स्याही खर्च करवा दी। हल्के फुल्के और थोड़े गंभीर झगड़े भी हुए पर जैसे जैसे गीत अपना स्वरूप लेता गया, मजा आने लगा। नए साल के इस पहले दिन हम सब क्यूँ ना यही मनोभाव अपने मन में पैदा करें कि जीवन के संघर्षों से घबराने की बजाए उनसे मुकाबला कर ऐसी सुहानी राह बनानी है जिस पर अपने और पराए दोनों ही रश्क कर सकें। 03-TERI DAASTAN CD MISC-20190106 TRACK#03 3:04 HICHKI-2018; JASLEEN ROYAL; NEERAJ RAJAWAT https://www.youtube.com/watch?v=nWazIXT3Xno वार्षिक संगीतमाला 2018 पायदान # 24 : वो हवा हो गए देखते देखते Dekhte Dekhte संगीतमाला की अगली सीढ़ी पर विराजमान है संगीतकार रोचक कोहली, गीतकार मनोज मुन्तशिर और गायक आतिफ असलम की तिकड़ी "बत्ती गुल मीटर चालू" के इस गीत के साथ, जिसका मुखड़ा नुसरत फतेह अली खाँ की कव्वाली से प्रेरित है। लगता है मेरे रश्के क़मर के पिछले साल हिट हो जाने के बाद नुसरत साहब की कव्वालियों को फिर से बनाने की माँग, निर्माताओं ने बढ़ा दी है। यही वजह कि इस साल फिल्म Raid में सानू इक पल चैन ना आवे , फन्ने खान में ये जो हल्का हल्का सुरूर है और सिम्बा में तेरे बिन नहीं लगदा दिल ढौलना की गूँज है। मैं पुराने गीतों के फिर बने वर्जन को मूल गीतों की अपेक्षा कम अहमियत देता हूँ क्यूँकि फिल्म संगीत में चली ये प्रवृति कलाकारों की रचनात्मकता को कम करती है। बहरहाल ये गीत इस गीतमाला में है तो उसकी वजह इसके सहज पर शायराना बोल हैं। वैसे तो रोचक और आतिफ ने इस गीत में अपनी अपनी भूमिकाएँ निभायी हैं पर इसी कारण से मैं इस गीत का असली नायक मनोज मुन्तशिर को मानता हूँ। मनोज मुन्तशिर An Indian Morning की संगीतमालाओं के लिए कोई नए नाम नहीं हैं। पिछले चार पाँच सालों में उनके दर्जन भर गीत मेरी संगीतमाला में शामिल रहे हैं। मनोज की खासियत है कि वो रूमानियत को सहज शब्दों की शायराना चाशनी में इस तरह घोलते हैं कि बात सुनने वाले तक तुरंत पहुँच जाती है। यही वजह है कि उनकी लोकप्रियता युवाओं में इतनी ज्यादा है। तेरे संग यारा, फिर कभी, ले चला, तेरी गलियाँ जैसे उनके दर्जनों गीतों की लोकप्रियता उनके शब्दों की मुलायमियत में छिपी है। तो लौटें इस गीत पर। आपको याद होगा कि पिछले साल भी नुसरत साहब की कव्वाली मेरे रश्के क़मर तूने पहली नज़र को भी मनोज ने अपने शब्दों मे ढालकर खासी लोकप्रियता अर्जित की थी। अगर आप यहाँ भी नुसरत साहब की मूल कव्वाली सुनने के बाद ये गीत सुनेंगे तो हुक लाइन को छोड़ देने से लगेगा कि आप एक नया ही गीत सुन रहे हैं। रोचक कोहली की गिटार पर महारत जग जाहिर है। पिछले साल आप उनका कमाल लखनऊ सेंट्रल के गीत मीर ए कारवाँ में सुन ही चुके हैं। इस गीत का प्रील्यूड भी उन्होंने गिटार पर ही रचा है। ताल वाद्यों की बीट्स पूरे गीतों के साथ चलती है तो आइए सुनते हैं ये गीत आतिफ असलम की आवाज़ में। इस नग्मे को फिल्माया गया है शाहिद और श्रद्धा कपूर की जोड़ी पर। 04-DEKHTE DEKHTE CD MISC-20190106 TRACK#04 4:05 BATTI GUL METER CHAALU-2018; ATIF ASLAM; ROCHAK KOHLI; MANOJ MUNTASHIR https://www.youtube.com/watch?v=rkWJyMhIWLo वार्षिक संगीतमाला 2018 पायदान # 23 : चल, चल वे तू बंदेया जहाँ कोई किसी को ना जाने .. Bandeya वार्षिक संगीतमाला की अगली सीढ़ी पर जो गीत है उसके संगीतकार हैं तोशी और शरीब साबरी। अगर आप पिछले दो दशकों से टीवी पर आने वाले संगीत शो देखते रहे हों तो आप साबरी भाइयों के नाम से अनजान नहीं होंगे। शास्त्रीय संगीत से जुड़े साबरी खानदान के इन चिरागों में से तोशी को मैंने 2007 में अमूल स्टार वायस आफ इ्डिया में सुना था जबकि उनके छोटे भाई शारिब उसके दो साल पहले सा रे गा मा पा के फाइनलिस्ट रहे थे। अपनी गायिकी के लिए वाहवाही पाने वाले ये प्रतिभागी आगे चलकर फिल्म उद्योग में संगीतकार की भूमिका निभाएँगे ये कौन जानता था? हालांकि पिछले एक दशक में सवा दर्जन फिल्मों के चुनिंदे नग्मे ही उनकी झोली में गिरे हैं और इस लिहाज से वे हिन्दी फिल्म संगीत में अपने पाँव नहीं जमा पाए हैं। पिछले दो सालों में उन्हें सिर्फ फुकरे रिटर्न, मित्रों और दिल जंगली के कुछ गानों को संगीतबद्ध करने का मौका मिला है। आपको याद होगा कि 2017 में एक छोटी सी बच्ची की पिटाई करते हुए एक माँ का वीडियो विराट कोहली और अन्य बड़ी हस्तियों के शेयर करने से वायरल हो गया था । बाद में पता चला कि वो बच्ची साबरी बंधुओं की सगी भतीजी है। शायद इन विवादों का असर उनके काम पर भी पड़ा हो। हालांकि 2018 में संगीतबद्ध अपने दो गीतों में से एक बंदेया में वो अपनी शानदार वापसी करते हुए नज़र आए हैं। फिल्म दिल जंगली के लिए उन्होंने जो गीत रचा है वो एक मायूसी भरा गीत है जो अपने प्रिय से बिछड़ने का दर्द बयाँ करता हैं। गीत का मुखड़ा मुझे मोहम्मद रफी के उस कालजयी गीत तेरी गलियों में ना रखेंगे कदम आज के बाद. की याद दिलाता है । यहाँ भी गीतकार देवेंद्र काफिर गीत की शुरुआत में इन गलियों को छोड़ने की सलाह देते हैं जहाँ आपके वज़ूद की कीमत प्रियतम के लिए नहीं रही। इस गीत में बढ़िया पंक्तियाँ वो लगती हैं जब वे कहते हैं.. ख़्वाब जो हुए हैं खंडहर, ख़्वाब ही नहीं थे...इक नींद थी नीम सी ..ख्वाबों के टूटने की तिक्तता को नीम की पत्तियों के कसैले स्वाद से जोड़ने का गीतकार देवेंद्र काफिर का बिंब एक नयापन लिए था। अरिजीत उदासियों को स्वर देने वाले गीतों को गाने में माहिर रहे हैं पर कभी कभी उनके गीतों में एक तरह का दोहराव सा प्रतीत होता है जिसके लिए मैं उनसे ज्यादा उनकी आवाज़ का इस्तेमाल करनेवाले संगीतकारों को दोषी मानता हूँ। इसी साल आई फिल्म "बाजार" में इसी भाव को लिए गीत छोड़ दिया में मुझे ऐसा ही महसूस हुआ था। जहाँ तक "बंदेया" का सवाल है तो गीत के लिए रची गयी साबरी बंधुओं की मधुर लय के साथ अरिजीत पूरा न्याय करते दिखते हैं। 05-BANDEYA CD MISC-20190106 TRACK#05 3:02 DIL JUNGLEE-2018; ARIJIT SINGH; TOSHI-SHARIB; DEVENDRA KAFIR https://www.youtube.com/watch?v=IQBHvifde6A वार्षिक संगीतमाला 2018 पायदान # 22 : दिल मेरी ना सुने, दिल की मैं ना सुनूँ Dil Meri Na Sune संगीतमाला की पिछली सीढी पर अगर आपको बंदेया ने थोड़ा उदास कर दिया था तो आज के इस बेहद मधुर गीत को सुन आपका भी दिल कुछ पलों को झूमने के लिए मजबूर हो जाएगा। इस गीत में गीतकार और गायक की वही जोड़ी है जो दो पॉयदानें पीछे थीं। जी हाँ एक बार फिर आ रहे हैं गीतकार मनोज मुन्तशिर,आतिफ असलम के साथ जीनियस फिल्म के इस गीत में। कुछ ही साल पहले की बात है जब इस गीत के संगीतकार ना केवल अपने गीतों से बल्कि अपनी आवाज़ से भी आपके कानों में हर रोज़ दस्तक देते रहते थे। उन दिनों शादी बारात समारोह में आने वाला हर डीजे इनके ही गीत बजाया करता था। बतौर संगीतकार इनके चाहनेवाले तो हमेशा रहे पर इनकी गायिकी को झेल पाना श्रोताओं के एक तबके के लिए काफी मुश्किल होता था। फिर ये हुआ कि इन्होंने गाना छोड़ दिया और अचानक ही बतौर हीरो दिखने लगे। वो दौर भी धीमा पड़ा और पिछले दो सालों में संगीत और फिल्म जगत के परिदृश्य से वे एकदम से गायब ही हो गए। आप समझ तो रहे होंगे ना कि मैं किस की बात कर रहा हूँ ? जी बिल्कुल सही समझे आप। मेरा इशारा हीमेश रेशमिया की ही तरफ है। आप जानना चाहेंगे कि इस ब्रेक के दौरान उन्होंने क्या किया ? इस साल वे कुछ सिंगल्स करते दिखे। देश विदेश में कनसर्ट किए और एक बात और हुई कि उन्होंने इसी साल दूसरी शादी भी की। कुछ गीत मुखड़ों तक आते आते ही आपको अपने मोहपाश में बाँध लेते हैं। दिल मेरी ना सुने, दिल की मैं ना सुनूँ एक ऐसा ही नग्मा है जिसकी धुन इतनी मधुर है कि मुखड़े तक पहुँचते ही मन झूमने लगता है। हीमेश ने इस गीत के प्रील्यूड और इंटरल्यूड में बाँसुरी का इस्तेमाल किया है। इस बाँसुरी की मोहक धुन को बजाया है वादक तेजस विनचूरकर ने। इस गीत के लिए हीमेश और आतिफ ने पहली बार साथ काम किया। हीमेश की इस प्यारी धुन को आतिफ की आवाज़ का बेहतरीन साथ मिला और नतीजन ये गीत करोड़ों बार यू ट्यूब पर बजा। तो चलिए अब साथ चलते हैं मनोज मुन्तशिर के शब्दों के इन शब्दों के साथ दो जवाँ दिलों की आहटें टटोलने। 06-DIL MERI NA SUNE CD MISC-20190106 TRACK#06 3:56 GENIUS-2018; ATIF ASLAM; HIMESH RESHAMMIYA; MANOJ MUNTASHIR https://www.youtube.com/watch?v=fhdxObbcs7c वार्षिक संगीतमाला 2018 पायदान # 21 : जिया में मोरे पिया समाए Piya Samaye 2018 की चल रही An Indian Morning की वार्षिक संगीतमाला की कड़ियों में आज का गीत है एक कव्वाली की शक़्ल में फिल्म मुल्क से और इसे अपनी आवाज़ से सँवारा है शफ़क़त अमानत अली खाँ ने। इक ज़माना था जब पुरानी हिंदी फिल्मों में अलग अलग परिस्थितियों में कव्वालियों का इस्तेमाल हुआ करता था। पुरानी फिल्मों की कव्वालियों को याद करूँ तो मन में तुरंत ना तो कारवाँ की तलाश है, तेरी महफिल में किस्मत आज़मा कर हम भी देखेंगे, निगाहें मिलाने को जी चाहता है, पर्दा है पर्दा और हैं अगर दुश्मन जैसे तमाम गीतों की याद उभरती है। पिछले कुछ दशकों से कव्वाली, फिल्मों में सूफ़ियत से रँगे गीतों में ही सिमट कर रह गयी है। अगर आज के फिल्मी परिदृश्य में कव्वालियों का इतना स्वरूप भी बचा है तो इसमें ए आर रहमान व नुसरत फतेह अली खाँ का खासा योगदान है। रहमान ने पिछले दशक में ख्वाजा मेरे ख्वाजा, कुन फाया कुन और पिया मिलेंगे जैसे अपने संगीतबद्ध गीतों से कव्वालियों को फिर लोकप्रियता के नए शिखर तक पहुँचाया। मुल्क की इस कव्वाली पिया समाए को लिखा है शकील आज़मी ने। पिछले एक दशक में दर्जन भर फिल्मों में गीत लिखने वाले शकील एक गीतकार से ज्यादा एक लोकप्रिय शायर के रूप में चर्चित रहे हैं। मेरे ख्याल से मुल्क के इस गीत में पहली बार शकील को अपना हुनर सही ढंग से दिखाने का मौका मिला है। गीत में पिया शब्द से ईश्वर को संबोधित किया गया है। शकील ने इस गीत के माध्यम से कहना चाहा है कि सबका परवरदिगार एक है भले ही उसके रंग अलग अलग हों। इसलिए लोगों में धर्म के नाम पर भ्रम जाल पैदा करने वाले लोगों के लिए वो लिखते हैं..सात रंग हैं सातों पिया के...देख सखी कभी तू भी लगा के...सातों से मिल के भयी मैं उलझी...कोई हरा कोई गेरुआ बताए। गीत में शकील ने गौरैया, पीपल,कबूतर जैसे बिंबों का बड़ी खूबसूरती से प्रयोग किया है। इस कव्वाली की धुन बनाई है इस साल कारवाँ और मुल्क जैसी फिल्मों से अपना सांगीतिक सफ़र शुरु करने वाले असम के लोकप्रिय संगीतकार अनुराग सैकिया ने। परम्परागत भारतीय ताल वाद्यों ढोलक व तबला के साथ अनुराग ने गीत में हारमोनियम व गिटार का इस्तेमाल किया। गीत के बीच में इस्तेमाल की गयी उनकी सरगम मन मोहती है। इस गीत में शफक़त का साथ दिया है अरशद हुसैन और साथियों ने। गीत के बोल बनारसी लहजे में रँगे हैं। शफक़त की गायिकी तो हमेशा की तरह जानदार है पर एक जगह सातों से मिल के भयी मैं उलझी की जगह वो उझली बोलते सुनाई पड़े हैं। तो आइए सुनते हैं मुल्क फिल्म की ये कव्वाली 07-PIYA SAMAYE CD MISC-20190106 TRACK#07 4:50 MULK-2018; SHAFQAT AMANAT ALI KHAN, ARSHAD HUSSAIN; ANURAG SAIKYA; SHAQEEL AZMI https://www.youtube.com/watch?v=HQI0vdO8YQQ आजकल डांस नंबर का मतलब पंजाबी बोली से मिश्रित ऐसे गीतों से हो गया हैं जिसके संगीत तेज बीट्स पर आधारित हो और साथ में रैप का तड़का हो। अगर आपकी पसंद भी ऐसी है तो माफ कीजिएगा ये पोस्ट आपके लिए नहीं है। मेरे लिए तो लोकधुनों की सुरीली तान भी थिरकने का सबब बनती हैं और पाश्चात्य संगीत से सजी धुनें भी। झूमने झुमाने वाली धुनों के के साथ चुहलबाजी करते शब्द हों तो वो मेरे लिए सोने पर सुहागा का काम करते हैं। मस्ती का रंग घोलने के लिए गीत जो मैंने आपके लिए चुना है वो है फिल्म "पटाखा" से। पटाखा दो ऐसी बहनों की कहानी है जो आपस में हमेशा लड़ती झगड़ती रहती हैं। फिल्म में एक परिस्थिति है जिसमें एक दूसरे के बलमा को नीचा दिखाने की दोनों बहनों में होड़ है। विवाह जैसे उत्सवों में आपने देखा होगा कि गाँवों में गाली गाए जाने की परंपरा होती है। गुलज़ार ने गालियो की उस भाषा को थोड़ी सौम्यता बरतते हुए विशाल भारद्वाज की धुन पर एक शरारत भरा गीत रचा है जो रेखा भारद्वाज और सुनिधि चौहान की आवाज़ में चुहल का एक अनूठा रूप प्रस्तुत करता है। 08-BALMA CD MISC-20190106 TRACK#08 4:52 PATAAKHA-2018; REKHA BHARDWAJ, SUNIDHI CHAUHAN; VISHAL BHARDWAJ; GULZAR https://www.youtube.com/watch?v=o-nxdq41CmQ THE END समाप्त
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